अपना पैसा अटक गया ,लेने वाला व्यक्ति न दे रहा हो ,भूमि सम्बंदित विवाद ।

मार्कण्डेय उवाच॥१६॥
ततो वव्रे नृपो राज्यमविभ्रंश्यन्यजन्मनि।
अत्रैव च निजं राज्यं हतशत्रुबलं बलात्॥१७॥
मार्कण्डेयजी कहते हैं – ॥१६॥ तब राजा ने दूसरे जन्म में नष्ट न होनेवाला राज्य माँगा तथा इस जन्म में भी शत्रुओं की सेना को बलपूर्वक नष्ट करके पुन: अपना राज्य प्राप्त कर लेने का वरदान माँगा ॥१७॥

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