शतचंडी पाठ पूजन विधि और सामग्री(दुर्गा शतचंडी/नवचंडी पाठ पूजन सामग्री)

शतचंडी और नवचंडी पूजा, देवी दुर्गा को समर्पित अत्यंत शक्तिशाली और महत्वपूर्ण हिंदू अनुष्ठान हैं। इन पूजाओं में विशेष मंत्रों, हवन, और श्रद्धा से भरपूर विधियों के माध्यम से देवी की आराधना की जाती है। ये समारोह गहराई से धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखते हैं।

इन पूजाओं का आयोजन विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है—जैसे देवी का आशीर्वाद प्राप्त करना, आध्यात्मिक प्रगति की कामना, जीवन में आने वाली बाधाओं का निवारण, और विशिष्ट इच्छाओं की पूर्ति।

इन पवित्र अनुष्ठानों को विधिवत सम्पन्न करने के लिए विशेष पूजन-सामग्री की आवश्यकता होती है। उचित सामग्री के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है, इसलिए भक्तों के लिए यह जानना आवश्यक है कि कौन-कौन सी वस्तुएं इन पूजाओं के लिए अनिवार्य होती हैं।

यह लेख शतचंडी और नवचंडी पाठ हेतु आवश्यक सभी सामग्रियों की एक विस्तृत और व्यवस्थित सूची प्रदान करता है, ताकि साधक इन धार्मिक अनुष्ठानों की तैयारी पूर्ण श्रद्धा, शुद्धता और विधिपूर्वक कर सकें।

शतचंडी एवं नवचंडी पूजा सामग्री सूची

शतचंडी और नवचंडी पूजा अत्यंत दिव्य एवं शक्तिशाली अनुष्ठान हैं, जो देवी दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की आराधना हेतु किए जाते हैं। इन पूजाओं को विधिपूर्वक संपन्न करने के लिए विशेष पूजन-सामग्री की आवश्यकता होती है। नीचे पूजा हेतु आवश्यक वस्तुओं की एक व्यापक सूची प्रस्तुत की जा रही है:

🔸 चंदन, सिंदूर एवं रंग सामग्रियाँ

  • पीला सिंदूर – 10 ग्राम
  • लाल सिंदूर – 10 ग्राम
  • पीला अष्टगंध चंदन – 10 ग्राम
  • लाल चंदन – 10 ग्राम
  • विस्तृत चंदन – 10 ग्राम
  • हल्दी – 50 ग्राम
  • दारू हल्दी – 50 ग्राम
  • आंबा हल्दी – 50 ग्राम
  • लाल रंग, पीला रंग, काला रंग, नारंगी रंग, हरा रंग, बैंगनी रंग – प्रत्येक 5 ग्राम
  • अबीर गुलाल (लाल, पीला, हरा, गुलाबी) – प्रत्येक 10 ग्राम
  • बुक्का (अभ्रक) – 10 ग्राम

🔸 सामान्य पूजन सामग्री

  • सुपारी – 100 ग्राम
  • लँगो – 10 ग्राम
  • वलायची (इलायची) – 10 ग्राम
  • सर्वौषधि – 1 डिब्बी
  • सप्तमृतिका – 1 डिब्बी
  • सप्तधान्य – 100 ग्राम
  • सरसों (पीली और काली) – प्रत्येक 50 ग्राम
  • जनेऊ (यज्ञोपवीत) – 21 पीस
  • पर्ल बड़ी – 1 शीशी
  • गारी के गोले (सूखे) – 11 पीस
  • पानी वाला नारियल – 1 पीस
  • जटादार सूखा नारियल – 2 पीस
  • अक्षत (चावल) – 11 किलो
  • दानबत्ती – 2 पैकेट
  • रुई की बत्ती (गोल व लंबी) – 1-1 पैकेट
  • देशी घी – 1 किलो
  • सरसों का तेल – 1 किलो
  • कपूर – 50 ग्राम
  • कलावा – 7 पीस
  • चुनरी (लाल और पपी रंग) – 1-1 पीस

🔸 विशेष रंग/मालाएँ/धार्मिक प्रतीक

  • कहन (सिंदूरी वस्तु) – 500 ग्राम
  • उम्मीद – 100 ग्राम
  • गंगाजल – 1 शीशी
  • गुलाबजल – 1 शीशी
  • लाल वस्त्र – 5 मीटर
  • पीला वस्त्र – 5 मीटर
  • सफेद वस्त्र – 5 मीटर
  • हरा वस्त्र – 2 मीटर
  • काला वस्त्र – 2 मीटर
  • नीला वस्त्र – 2 मीटर
  • बंदनवार (शुभ-लाभ) – 2 पीस
  • स्वास्तिक (स्टिकर) – 5 पीस
  • त्रिसूक्ति हेतु धागा (लाल, सफेद, काला) – 1-1 पीस
  • झंडा (देवी दुर्गा का) – 1 पीस
  • रुद्राक्ष की माला – 1 पीस
  • कमलगट्टे की माला – 1 पीस

🔸 अन्य उपयोगी वस्तुएँ

  • माचिस – 2 पीस
  • आम की लकड़ी – 5 किलो
  • नवग्रह समिधा – 1 पैकेट
  • हवन सामग्री – 2 किलो
  • तिल (काला एवं सफेद) – 500-500 ग्राम
  • जौ – 500 ग्राम
  • गुड़ – 500 ग्राम
  • कमलगट्टा – 100 ग्राम
  • गुग्गुल – 100 ग्राम
  • दून – 100 ग्राम
  • सुन्दर बाला – 50 ग्राम
  • स्वादिष्ट कोकिला – 50 ग्राम
  • नागरमोथा – 50 ग्राम
  • जटामांसी – 50 ग्राम
  • अगर-तगर – 100 ग्राम
  • इंद्र जौ – 50 ग्राम
  • बेलगुडा – 100 ग्राम
  • सतावर – 50 ग्राम
  • गुरच – 50 ग्राम
  • जावित्री – 25 ग्राम
  • जायफल – 1 पीस
  • भोजपत्र – 1 पैकेट
  • कस्तूरी – 1 डिब्बी
  • केसर – 1 डिब्बी
  • खैर की लकड़ी – 4 पीस

🔸 भोग व आहुतियों हेतु सामग्री

  • काला उड़द – 250 ग्राम
  • मूंग दाल पापड़ – 1 पैकेट
  • पंचमेवा – 200 ग्राम
  • चिरौंजी – 25 ग्राम
  • पंचरत्न एवं पंचधातु – 1 डिब्बी

🔸 धार्मिक चिन्ह एवं यंत्र

  • त्रिशूल एवं चक्र – 1-1 पीस
  • मोती – 1 पीस
  • शंख एवं धनुष – 1-1 पीस
  • गोरोचन – 1 डिब्बी
  • गेरू – 50 ग्राम
  • कालीमिर्च – 50 ग्राम
  • दुर्गा सप्तशती की पुस्तक – 1 पीस

घर से लाई जाने वाली सामग्री सूची

मिष्ठान एवं फल-फूल सामग्री

  • पेड़ा – 500 ग्राम
  • ऋतु फल – 5 प्रकार
  • केला – 1 दर्जन
  • अनार दाना – 100 ग्राम
  • अनार का छिलका / पुष्प – 250 ग्राम / 5 पीस

पत्ते एवं पूजन पौधियाँ

  • पान के पत्ते – 21 पीस
  • केले के पत्ते – 5 पीस
  • आम के पत्ते – 2 डाली
  • दूब घास – 100 ग्राम
  • बेल पत्र – 11 पीस
  • तुलसी पत्ती – 5 पीस
  • पता (वृक्ष की पत्तियाँ, विशेष पूजन हेतु) – 8 पीस

फूल एवं माला सामग्री

  • कमल का फूल – 5 पीस
  • कनेर का फूल – 5 पीस
  • गुलाब / गेंदा के फूल (खुले हुए) – 500 ग्राम
  • गुलाब की माला – 5 माला
  • गेंदे की माला – 7 माला

दीपक, कलश एवं बर्तन सामग्री

  • अखंड दीपक – 1 पीस
  • पीतल / कांसे का कलश (ढक्कन सहित) – 1 पीस
  • थाली – 7 पीस
  • लोटा – 2 पीस
  • कटोरी – 9 पीस
  • परात – 4 पीस
  • मिट्टी का कलश (बड़ा) – 11 पीस
  • मिट्टी का प्याला – 21 पीस
  • जौ बोने हेतु मिट्टी का प्याला – 1 पीस
  • मिट्टी की दीयों (दीयाली) – 21 पीस
  • ब्रह्मपूर्ण पात्र (अनाज से भरा पात्र आचार्य के लिए) – 1 पीस
  • हवन कुण्ड – 1 पीस

तरल सामग्री

  • दूध – 1 लीटर
  • जल (पूजन हेतु – शुद्ध जल)
  • पंचामृत – (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से बना)
  • गुलाबजल / गंगाजल (यदि घर में उपलब्ध हो)

मिट्टी/गोबर से संबंधित सामग्री

  • गाय का गोबर (दीप, वेदी या लिपाई हेतु)
  • मिट्टी / बालू (जौ बोने हेतु)
  • ऐड का आसन (मिट्टी / लकड़ी का)

देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ / मूर्तियाँ

  • श्री गणेश जी की मूर्ति – 1
  • लक्ष्मी माता की मूर्ति – 1
  • श्री राम दरबार – 1
  • श्री कृष्ण भगवान की मूर्ति – 1
  • श्री हनुमान जी की मूर्ति – 1
  • दुर्गा माता की मूर्ति – 1
  • शिव शंकर भगवान की मूर्ति – 1

अन्य विशेष सामग्री

  • मावर – 100 ग्राम
  • कागजी – 2 पीस
  • बिजौरा – 2 पीस
  • कुड़ (फूल / फल) – 1 पीस
  • लौकी – 1 पीस
  • “पढ़ें” – 250 ग्राम (कृपया स्पष्ट करें – शायद कोई विशेष सामग्री है)
  • मुसलमान – 500 ग्राम (यहाँ शब्द स्पष्ट नहीं है — कृपया पुनः जांचें या स्पष्ट करें)
  • कथा – 1 पीस (यदि यह धार्मिक पुस्तक है या कोई विशेष पूजन सामग्री है)
  • ओ – 100 ग्राम (इसका विवरण स्पष्ट नहीं है — कृपया बताएं यह किस वस्तु को संदर्भित करता है)
  • (अन्य सामग्री – 500 ग्राम) (इसका नाम छूट गया है – कृपया बताएं)
  • कैंची / चाकू (माला या लड़ियाँ काटने हेतु) – 1 पीस
  • माँ दुर्गा की ध्वजा लगाने हेतु बांस (छोटा/बड़ा) – 1 पीस
  • हलुआ एवं खेड़ (भोग हेतु प्रसाद)

शतचंडी और नवचंडी पूजा हेतु तैयारी और शुद्धिकरण की आवश्यक सामग्री एवं विधियाँ

सफाई एवं स्नान सामग्री (Preparation & Purification Items)

शतचंडी और नवचंडी पूजा जैसे महान अनुष्ठानों की सफलता के लिए पवित्रता और शुद्धि अत्यंत आवश्यक होती है। यह शुद्धिकरण प्रक्रिया पूजा से पहले प्रारंभ होती है — स्वयं के शरीर, मन और पूजा सामग्री की सफाई से लेकर, पूजा स्थल की पूर्ण शुद्धि तक।

स्वयं की शुद्धि के लिए आवश्यक वस्तुएँ:

  1. पंचामृत
    दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का पवित्र मिश्रण।
    – उपयोग: देवताओं को स्नान कराने एवं अभिषेक हेतु।
  2. गंगाजल
    – गंगा नदी का पवित्र जल, जो शुद्धिकरण का प्रतीक है।
    – उपयोग: स्नान, छिड़काव और आचमन में।
  3. हर्बल स्नान पैक
    – नीम, हल्दी और अन्य औषधीय जड़ी-बूटियों से बना।
    – उपयोग: शरीर की बाह्य शुद्धि के लिए।
  4. चंदन का लेप
    – ठंडक और सुगंध से भरपूर।
    – उपयोग: स्नान के बाद शरीर पर लगाने हेतु, मानसिक शांति और शुद्धि के लिए।

🔸 इन सभी शुद्धिकरण क्रियाओं का महत्व केवल शारीरिक नहीं है, बल्कि यह आंतरिक और आध्यात्मिक शुद्धता का भी प्रतीक है। यह साधक को पूजा के लिए मानसिक रूप से निर्मल और दिव्य अनुभव के लिए तैयार करता है।

पूजा स्थल की शुद्धि (Sanctifying the Sacred Space)

शतचंडी और नवचंडी अनुष्ठान में पूजा स्थल की पवित्रता सर्वोपरि मानी जाती है। एक शुद्ध, शांत और सकारात्मक वातावरण देवी की कृपा को आकर्षित करता है और साधना को सशक्त बनाता है।

🧹 पूजा स्थल की शुद्धि हेतु प्रमुख क्रियाएँ:

  1. भौतिक सफाई
    – पूरे क्षेत्र को झाड़ू-पोंछे द्वारा स्वच्छ करें।
    – अव्यवस्था और बेकार वस्तुएँ हटा दें।
  2. धूप/धुनी से वातावरण की शुद्धि
    – सेज, लोबान, गूगल या अन्य पवित्र धूप सामग्रियाँ जलाकर हर कोने में धुनी दें।
  3. पवित्र जल का छिड़काव
    – गंगाजल या पंचगव्य का उपयोग करते हुए सभी दिशाओं में जल का छिड़काव करें।
  4. सुरक्षात्मक घेरा बनाना
    – पूजा स्थल के चारों ओर हल्दी या चंदन से रेखा खींचें
    – यह नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा का प्रतीक होता है और एक दिव्य परिधि तैयार करता है।

🔸 इस पवित्र परिधि के भीतर की गई पूजा अधिक प्रभावकारी और फलदायी मानी जाती है, क्योंकि वहाँ केवल शुभ और सात्विक ऊर्जा का ही प्रवाह होता है।

आध्यात्मिक उद्देश्य

शुद्धिकरण केवल अनुष्ठानिक नियमों का पालन नहीं है, बल्कि यह साधक के मन, शरीर और आत्मा को संयमित करने की एक प्रक्रिया है। इससे:

  • साधक के भीतर श्रद्धा, भक्ति और एकाग्रता जागृत होती है।
  • पूजा स्थल एक दिव्य ऊर्जा केंद्र बन जाता है।
  • अनुष्ठानिक प्रक्रिया में सामर्थ्य और सफलता की संभावनाएँ बढ़ जाती हैं।

🙏 शतचंडी और नवचंडी पूजा के बाद की प्रक्रियाएँ और आवश्यक सामग्री

शतचंडी और नवचंडी जैसे विशिष्ट अनुष्ठानों का समापन उतना ही महत्वपूर्ण होता है जितना कि उनका आरंभ। पूजा की पूर्णता केवल मंत्रोच्चारण या हवन की समाप्ति से नहीं, बल्कि बाद की शुद्ध प्रक्रिया और सम्मानपूर्वक समापन से होती है। यह चरण न केवल भौतिक वस्तुओं के समायोजन से जुड़ा है, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा को शांत और संतुलित करने का माध्यम भी है।

1. अनुष्ठान अवशेषों का सम्मानपूर्वक निपटान

पूजा के बाद बची सामग्री जैसे फूल, पत्तियाँ, भस्म, हवन की राख आदि का सही और पवित्र रूप से निपटान आवश्यक है:

  • जैव-अपघटनीय (Biodegradable) सामग्री
    जैसे फूल, पत्तियाँ, प्रसाद आदि को बहते जल में प्रवाहित करें या भूमि में श्रद्धा के साथ दबा दें।
    ये सामग्रियाँ प्रकृति को लौटा दी जाती हैं — माँ प्रकृति को पुनः समर्पित
  • गैर-जैविक सामग्री
    जैसे प्लास्टिक, कृत्रिम वस्त्र, थैली इत्यादि को पर्यावरणीय नियमों के अनुसार अलग कर सुनियोजित तरीके से नष्ट करें।
  • दोबारा उपयोग योग्य वस्तुएँ
    जैसे देवी-देवताओं की मूर्तियाँ, पूजा के बर्तन, कपड़े आदि को साफ करके सुरक्षित रखें।
    इन्हें अगली पूजा के लिए पुनः उपयोग में लाया जा सकता है।

🔸 यह प्रक्रिया सिर्फ सफाई नहीं, बल्कि पूजन काल में आहूत हुई ऊर्जाओं का शांत, सौम्य और सम्मानजनक विसर्जन है।

2. प्रसाद और नैवेद्य का वितरण

प्रसाद वितरण, अनुष्ठान में प्राप्त दिव्य आशीर्वाद को सभी के साथ साझा करने का माध्यम है। यह सामूहिक भक्ति और सौहार्द की भावना को बढ़ाता है।

  • प्रसाद को पहले भगवान को अर्पित करें, फिर पुजारी को, और अंत में भक्तों में वितरित करें।
  • प्रसाद स्वच्छ, सात्विक और शुद्ध वातावरण में तैयार होना चाहिए।
  • सभी के बीच समान रूप से और आदरपूर्वक वितरण करें।
  • यदि उपस्थित भक्तों में कुछ को खाद्य प्रतिबंध हों, तो उसे ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक प्रसाद तैयार करें।

🔸 प्रसाद वितरण केवल परंपरा नहीं, बल्कि विनम्रता, करुणा और आध्यात्मिक समानता की अभिव्यक्ति है।

3. पूजा के बर्तनों की सफाई और भंडारण

पूजा में उपयोग किए गए बर्तनों का उचित रूप से साफ करना और अलग भंडारण करना आवश्यक है:

  • पहले सभी बर्तनों को शुद्ध जल से धोकर साफ करें।
  • फिर किसी मुलायम सूती कपड़े से पोंछ कर सुखा लें।
  • बर्तन सामान्य रसोई के बर्तनों से अलग रखें — एक साफ और पवित्र स्थान पर।
  • यदि संभव हो, तो बर्तनों को रेशमी या सूती कपड़े में लपेटकर रखें ताकि उनकी पवित्रता बनी रहे।

🔸 यह कार्य पूजा की समग्रता का भाग है — जो दर्शाता है कि साधक न केवल देवी की उपासना करता है, बल्कि उस पूजा से जुड़ी हर वस्तु को भी श्रद्धा के साथ आदर देता है।

4. धन्यवाद ज्ञापन और समापन अनुष्ठान

पूजा के अंत में, ईश्वर, पुजारी और उपस्थित सभी भक्तों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करना भी अनिवार्य है:

  • देवताओं को धन्यवाद दें कि उन्होंने आपकी पुकार सुनी और उपस्थित रहे।
  • पुजारी, सहायक और सहभागियों के प्रयासों की सराहना करें।
  • पूजा से प्राप्त ज्ञान, शक्ति, और अंतर्दृष्टि पर चिंतन करें।
  • अपने भीतर यह संकल्प लें कि देवी से प्राप्त ऊर्जा और शिक्षाओं को जीवन में अपनाएंगे।

🔸 धन्यवाद ज्ञापन न केवल औपचारिकता है, बल्कि यह अहंकार के त्याग और भक्ति के उदय की पहचान है।

5. पूजा स्थल की पुनः स्थापना

  • पूजा समाप्ति के पश्चात स्थान को स्वच्छ करके उसकी मूल स्थिति में वापस ले जाएँ।
  • पवित्रता और शांति को बनाये रखने के लिए कुछ समय तक स्थल पर मौन या शांत वातावरण बनाए रखें।
  • यदि दीप जल रहा हो, तो उसे स्वतः बुझने दें या श्रद्धा से बुझाएँ।

निष्कर्ष

शतचंडी और नवचंडी पूजा देवी दुर्गा की आराधना का एक उच्चतम रूप है, जो शक्ति, भक्ति और आत्मिक उत्थान का माध्यम है।
इसमें सामग्री का संग्रहण, विधियों का पालन और समापन की शुद्धता — ये सभी चरण समर्पण की परिपूर्णता को दर्शाते हैं।

याद रखें:

  • केवल मंत्रों का उच्चारण नहीं,
  • केवल सामग्री का उपयोग नहीं,
  • बल्कि उसके पीछे की भावना, श्रद्धा और शुद्धता — यही असली पूजा है।

🌺 माँ दुर्गा आप सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और यह पवित्र अनुष्ठान आपके जीवन में शक्ति, ज्ञान और शांति का संचार करे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

शतचंडी पूजा के लिए कौन-कौन से ग्रंथ आवश्यक होते हैं?

शतचंडी पूजा के लिए मुख्य रूप से “दुर्गा सप्तशती” या “देवी महात्म्यम” ग्रंथ का पाठ किया जाता है।
यह ग्रंथ मार्कण्डेय पुराण से लिया गया है और इसमें देवी के तीनों रूपों – महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती – की स्तुति होती है।
इसके साथ जप माला, भोजपत्र, और अन्य पूजन सामग्रियाँ भी उपयोगी होती हैं।

क्या शतचंडी पूजा में किसी विशिष्ट देवता की मूर्ति की आवश्यकता होती है?

हां, शतचंडी पूजा में देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की प्रतिमा या चित्र आवश्यक होते हैं।
ये मूर्तियाँ पूजा का केंद्र होती हैं और अनुष्ठानिक ऊर्जा के आह्वान का माध्यम बनती हैं।
यदि संभव हो, तो पूजा स्थल पर नवदुर्गा के स्वरूपों या देवी के चंडी रूप की प्रतिमा रखें।

नवचंडी और शतचंडी पूजा में क्या अंतर है?

नवचंडी पूजा में देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। यह पूजा अपेक्षाकृत संक्षिप्त होती है और खासकर नवरात्रि के दौरान प्रचलित है।

शतचंडी पूजा एक वृहद अनुष्ठान है जिसमें दुर्गा सप्तशती का 100 बार पाठ किया जाता है।
यह विशेष रूप से शक्तिपीठों, यज्ञों, या बड़ी इच्छाओं की पूर्ति हेतु की जाती है।

शतचंडी और नवचंडी पूजा में सामान्य रूप से कौन-सी सामग्रियाँ आवश्यक होती हैं?

दोनों पूजाओं के लिए कुछ सामान्य और आवश्यक सामग्रियाँ होती हैं, जैसे:

  • अगरबत्ती और धूप
  • घी और कपूर
  • कुमकुम, हल्दी, चंदन
  • पवित्र जल (गंगाजल)
  • दीपक (तेल या घी के)
  • पुष्प, माला, और अक्षत (चावल)
  • कलश और नारियल

ये सभी सामग्रियाँ पूजा के विविध चरणों में उपयोग की जाती हैं।

पूजा स्थल को शुद्ध करने के लिए कौन-कौन से कदम उठाने चाहिए?

पूजा स्थल की पवित्रता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। शुद्धिकरण के लिए ये कदम अपनाएँ:

  1. स्थान की पूरी साफ-सफाई करें
  2. गंगाजल या गोमूत्र से छिड़काव करें
  3. धूप, हवन सामग्री या जड़ी-बूटियों से वातावरण को शुद्ध करें
  4. हल्दी या चंदन से मंडल या सुरक्षा रेखा बनाएं

इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और स्थान सकारात्मक ऊर्जा से भरता है।

Similar Posts

3 Comments

  1. मेहंदीपुर बालाजी में “संकट नाशक” हवन का मतलब है संकटमोचन यज्ञ, जो संकटों को दूर करने के लिए किया जाता है। भक्तों का मानना है कि इससे शारीरिक और मानसिक कष्टों का निवारण होता है। यह एक पाँच दिवसीय अनुष्ठान का हिस्सा हो सकता है या 41 दिनों के नियमों के बाद एक acharyajii. Com के अनुभवी कर्मकांडी ब्राह्मण द्वारा करवाया जाता है। हवन के बाद कुछ नियमों का पालन करना पड़ता है, जैसे कि मादक पदार्थों से दूर रहना।
    संकट नाशक हवन (संकटमोचन यज्ञ) के बारे में
    उद्देश्य: भक्तों के जीवन के सभी कष्टों और बाधाओं को दूर करना, विशेष रूप से भूत-प्रेत की बाधाओं से मुक्ति पाना।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *