अपनी कुंडली से जानिए आपको कोनसी बीमारी हो सकती हैं ?ओर उपाय क्या होंगे?

किस ग्रह से होती कौन-सी बीमारी जानिए

सूर्य के बाद धरती के उपग्रह चन्द्र का प्रभाव धरती पर पूर्णिमा के दिन सबसे ज्यादा रहता है। जिस तरह मंगल के प्रभाव से समुद्र में मूंगे की पहाड़ियां बन जाती हैं और लोगों का खून दौड़ने लगता है उसी तरह चन्द्र से समुद्र में ज्वार-भाटा उत्पत्न होने लगता है और लोगों के मन-मस्तिष्क में बैचेनी दौड़ने लगती है। जितने भी दूध वाले वृक्ष हैं सभी चन्द्र के कारण उत्पन्न हैं। चन्द्रमा बीज, औषधि, जल, मोती, दूध, अश्व और मन पर राज करता है। लोगों की बेचैनी और शांति का कारण भी चन्द्रमा है।

इसी तरह प्रत्येक ग्रह का हमारी धरती और हमारे शरीर सहित मन-मस्तिष्क पर प्रभाव पड़ता है जिसके चलते हमें सामान्य या गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है। यदि वक्त के पहले हम सतर्क हो जाएं तो हम कई सारी बीमारियों से कुद को बचा सकते हैं। आओ जानते हैं कि कौन सा ग्रह देता है कौन सी बीमारी…

सूर्य ग्रह से होती कौन-सी बीमारी, जानि ए

सूर्य की बीमारी :

  • व्यक्ति अपना विवेक खो बैठता है।
  • दिमाग समेत शरीर का दायां भाग सूर्य से प्रभावित होता है।
  • सूर्य के अशुभ होने पर शरीर में अकड़न आ जाती है।
  • मुंह में थूक बना रहता है।
  • दिल का रोग हो जाता है, जैसे धड़कन का कम-ज्यादा होना।
  • मुंह और दांतों में तकलीफ हो जाती है।
  • बेहोशी का रोग हो जाता है।
  • सिरदर्द बना रहता है।

चन्द्र ग्रह से होती कौन-सी बीमारी, जानि ए

चंद्र ग्रह से होती यह बीमारी:

  • चन्द्र में मुख्य रूप से दिल, बायां भाग से संबंध रखता है।
  • मिर्गी का रोग।
  • पागलपन।
  • बेहोशी।
  • फेफड़े संबंधी रोग।
  • मासिक धर्म गड़बड़ाना।
  • स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है।
  • मानसिक तनाव और मन में घबराहट।
  • तरह-तरह की शंका और अनिश्चित भय।
  • सर्दी-जुकाम बना रहता है।
  • व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने के विचार बार-बार आते रहते हैं।
    अगले पन्ने पर..मंगल ग्रह से होती कौन-सी बीमारी, जानि ए

मंगल देता यह बीमारी:

  • नेत्र रोग।
  • उच्च रक्तचाप।
  • वात रोग।
  • गठिया रोग।
  • फोड़े-फुंसी होते हैं।
  • जख्मी या चोट।
  • बार-बार बुखार आता रहता है।
  • शरीर में कंपन होता रहता है।
  • गुर्दे में पथरी हो जाती है।
  • आदमी की शारीरिक ताकत कम हो जाती है।
  • एक आंख से दिखना बंद हो सकता है।
  • शरीर के जोड़ काम नहीं करते हैं।
  • मंगल से रक्त संबंधी बीमारी होती है। रक्त की कमी या अशुद्धि हो जाती है।
  • बच्चे पैदा करने में तकलीफ। हो भी जाते हैं तो बच्चे जन्म होकर मर जाते हैं।
    बुध ग्रह से होती कौन-सी बीमारी, जानिए अगले पन्ने पर..

बुध ग्रह की बीमारी.:

*तुतलाहट।
*सूंघने की शक्ति क्षीण हो जाती है।
*समय पूर्व ही दांतों का खराब होना।
*मित्र से संबंधों का बिगड़ना।
*अशुभ हो तो बहन, बुआ और मौसी पर विपत्ति आना।
*नौकरी या व्यापार में नुकसान होना।
*संभोग की शक्ति क्षीण होना।
*व्यर्थ की बदनामी होती है।
*हमेशा घूमते रहना, ज्यादातर पहाड़ी इलाकों में।
*कोने का अकेला मकान जिसके आसपास किसी का मकान न हो।
अगले पन्ने पर, बृहस्पति ग्रह से होती कौन-सी बीमारी, जानि ए

गुरु की बीमारी :

*गुरु के बुरे प्रभाव से धरती की आबोहवा बदल जाती है। उसी प्रकार व्यक्ति के शरीर की हवा भी बुरा प्रभाव देने लगती है।
*इससे श्वास रोग, वायु विकार, फेफड़ों में दर्द आदि होने लगता है।
*कुंडली में गुरु-शनि, गुरु-राहु और गुरु-बुध जब मिलते हैं तो अस्थमा, दमा, श्वास आदि के रोग, गर्दन, नाक या सिर में दर्द भी होने लगता है।
*इसके अलावा गुरु की राहु, शनि और बुध के साथ युति अनुसार भी बीमारियां होती हैं, जैसे- पेचिश, रीढ़ की हड्डी में दर्द, कब्ज, रक्त विकार, कानदर्द, पेट फूलना, जिगर में खराबी आदि।
अगले पन्ने पर, शुक्र ग्रह से होती कौन-सी बीमारी, जानि ए

शुक्र की बीमारी :

  • घर की दक्षिण-पूर्व दिशा को वास्तु अनुसार ठीक करवाएं।
  • शरीर में गाल, ठुड्डी और नसों से शुक्र का संबंध माना जाता है।
  • शुक्र के खराब होने से वीर्य की कमी भी हो जाती है। इससे किसी भी प्रकार का यौन रोग हो सकता है या व्यक्ति में कामेच्छा समाप्त हो जाती है।
  • लगातार अंगूठे में दर्द का रहना या बिना रोग के ही अंगूठे का बेकार हो जाना शुक्र के खराब होने की निशानी है।
  • शुक्र के खराब होने से शरीर में त्वचा संबंधी रोग उत्पन्न होने लगते हैं।
  • अंतड़ियों के रोग।
  • गुर्दे का दर्द
  • पांव में तकलीफ आदि।
    अगले पन्ने पर, शनि से होती कौन-सी बीमारी, जानि ए

शनि की बीमारी :

  • शनि का संबंध मुख्‍य रूप से दृष्टि, बाल, भवें और कनपटी से होता है।
  • समय पूर्व आंखें कमजोर होने लगती हैं और भवों के बाल झड़ जाते हैं।
  • कनपटी की नसों में दर्द बना रहता है।
  • समय पूर्व ही सिर के बाल झड़ जाते हैं।
  • फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं और तब सांस लेने में तकलीफ होती है।
  • हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, तब जोड़ों का दर्द भी पैदा हो जाता है।
  • रक्त की कमी और रक्त में बदबू बढ़ जाती है।
  • पेट संबंधी रोग या पेट का फूलना।
  • सिर की नसों में तनाव।
  • अनावश्यक चिंता और घबराहट बढ़ जाती है।
    अगले पन्ने पर, राहु ग्रह से होती कौन-सी बीमारी, जानि ए

राहु की बीमारी :

  • गैस प्रॉब्लम।
  • बाल झड़ना
  • उदर रोग।
  • बवासीर।
  • पागलपन।
  • राजयक्ष्मा रोग।
  • निरंतर मानसिक तनाव बना रहेगा।
  • नाखून अपने आप ही टूटने लगते हैं।
  • मस्तिष्क में पीड़ा और दर्द बना रहता है।
  • राहु व्यक्ति को पागलखाने, दवाखाने या जेलखाने भेज सकता है।
  • राहु अचानक से भी कोई बड़ी बीमारी पैदा कर देता है और व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।
    अगले पन्ने पर, केतु ग्रह से होती कौन-सी बीमारी, जानि ए

केतु की बीमारी :

  • पेशाब की बीमारी।
  • संतान उत्पति में रुकावट।
  • सिर के बाल झड़ जाते हैं।
  • शरीर की नसों में कमजोरी आ जाती है।
  • केतु के अशुभ प्रभाव से चर्म रोग होता है।
  • कान खराब हो जाता है या सुनने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है।
  • कान, रीढ़, घुटने, लिंग, जोड़ आदि में समस्या उत्पन्न हो जाती है।

आचार्यजी संजय शास्त्री मेहन्दीपुर बालाजी

Similar Posts

  • प्रेतशाप के कारण

    नमश्चण्डिकायै, आज एक कुण्डली में प्रत्यक्ष प्रेतशाप के कारण सन्तान बाधा योग दिखा। जातक के पुत्र नहीं हो रहा था। गर्भ ठहरता नहीं, ठहरता भी तो परिपक्वता से पहले ही गिर जाता। बहुत उपाय किये तथापि कोई लाभ नहीं हुआ। डाक्टरी रिपोर्ट सब नार्मल। हमारे पास कुण्डली आयी तो प्रथम दृष्टि में ही पराशरहोरा शास्त्र…

  • शंकट नासक श्री हनुमतवडवानल स्तोत्र।

    विनियोग ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः,श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं,मम समस्त विघ्न-दोष-निवारणार्थे, सर्व-शत्रुक्षयार्थेसकल-राज-कुल-संमोहनार्थे, मम समस्त-रोग-प्रशमनार्थम्आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त-पाप-क्षयार्थंश्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये।ध्यानमनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रम,सकल-दिङ्मण्डल-यशोवितान-धवलीकृत-जगत-त्रितय,वज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्रउदधि-बंधन दशशिरः कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्रअञ्जनी-गर्भ-सम्भूत श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर कपि-सैन्य-प्राकारसुग्रीव-साह्यकरण पर्वतोत्पाटन कुमार-ब्रह्मचारिन् गंभीरनाद सर्व-पाप-ग्रह-वारण-सर्व-ज्वरोच्चाटन…

  • चंद्रमा को मजबूत करने के लिए पूर्णिमा की रात को सत्यनारायण कथा और पूजा का व्रत करें।

    चंद्रमा को मजबूत करने के लिए पूर्णिमा की रात को सत्यनारायण कथा और पूजा का व्रत करें। इसके अतिरिक्त, आप चंद्र देव की वैदिक पूजा कर सकते हैं जिसमें चंद्र मंत्र का जाप और दूध, चावल, सफेद फूल, चंदन व मिश्री से अर्घ्य देना शामिल है।सत्यनारायण कथा और पूजाव्रत का संकल्प: सुबह जल्दी उठकर व्रत…

  • व्यापार वृद्धि एवम महालक्ष्मी कृपा प्राप्तिकनक धारा स्तोत्र

    अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।। मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।2।। विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।3।। आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।4।। बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरि‍नीलमयी विभाति।0कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु…

  • आपकी कुंडली से जाने आपको कितने मुखी रुद्राक्ष धारण करना है।

    रुद्राक्ष कैसे पहने , एवं कितने मुखी रुद्राक्ष? 🔺रुद्राक्ष के विभिन्न देव कौन है ? 🔺कौनसा रुद्राक्ष किस ग्रह के लिए ठीक है? 🔺किस रुद्राक्ष को किस मंत्र एवं किस दिन पहने? 🔺कौनसा रुद्राक्ष किस चन्द्र एवं लगन राशि के लिए उत्तम है? 🔺 किस रुद्राक्ष से किस रोग में शांति प्राप्त होती है ?…

  • भैरव दीपदान रात्रि पूजा:-

    भैरव ध्यान:वन्दे बालं स्फटिक-सदृशम्, कुन्तलोल्लासि-वक्त्रम्।दिव्याकल्पैर्नव-मणि-मयैः, किंकिणी-नूपुराढ्यैः॥दीप्ताकारं विशद-वदनं, सुप्रसन्नं त्रि-नेत्रम्।हस्ताब्जाभ्यां बटुकमनिशं, शूल-दण्डौ दधानम्॥ मानसिक पूजन करे:ॐ लं पृथ्वी-तत्त्वात्मकं गन्धं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।ॐ हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।ॐ यं वायु-तत्त्वात्मकं धूपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये घ्रापयामि नमः।ॐ रं अग्नि-तत्त्वात्मकं दीपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये निवेदयामि नमः।ॐ सं सर्व-तत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः। बटुक भैरव स्तोत्र:ॐ भैरवो भूत-नाथश्च,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *