पंच दिवसीय आराधना आचार्यजी मेहन्दीपुर बालाजी


विनियोगः- ॐ अस्य श्रीनारायण कवचस्य भार्गव ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः, श्रीलक्ष्मीनारायणो देवता, ॐ बीजं, नमः शक्तिं, नारायणायेति कीलकं, श्रीलक्ष्मीनारायण प्रीत्यर्थे पाठे विनियोगः । ऋष्यादि-न्यासःॐ भार्गव ऋषये नमः शिरसि । अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे । श्रीलक्ष्मीनारायणदेवतायै नमः हृदि । ॐ बीजाय नमः गुह्ये । नमः शक्त्यै नमः पादयोः । नारायणायेति कीलकाय नमः नाभौ । श्रीलक्ष्मीनारायणप्रीत्यर्थे जपे विनियोगाय…
मेहंदीपुर बालाजी में “संकट नाशक” हवन का मतलब है संकटमोचन यज्ञ, जो संकटों को दूर करने के लिए किया जाता है। भक्तों का मानना है कि इससे शारीरिक और मानसिक कष्टों का निवारण होता है। यह एक पाँच दिवसीय अनुष्ठान का हिस्सा हो सकता है या 41 दिनों के नियमों के बाद एक acharyajii. Com…
भैरव ध्यान:वन्दे बालं स्फटिक-सदृशम्, कुन्तलोल्लासि-वक्त्रम्।दिव्याकल्पैर्नव-मणि-मयैः, किंकिणी-नूपुराढ्यैः॥दीप्ताकारं विशद-वदनं, सुप्रसन्नं त्रि-नेत्रम्।हस्ताब्जाभ्यां बटुकमनिशं, शूल-दण्डौ दधानम्॥ मानसिक पूजन करे:ॐ लं पृथ्वी-तत्त्वात्मकं गन्धं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।ॐ हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः।ॐ यं वायु-तत्त्वात्मकं धूपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये घ्रापयामि नमः।ॐ रं अग्नि-तत्त्वात्मकं दीपं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये निवेदयामि नमः।ॐ सं सर्व-तत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्रीमद् आपदुद्धारण-बटुक-भेरव-प्रीतये समर्पयामि नमः। बटुक भैरव स्तोत्र:ॐ भैरवो भूत-नाथश्च,…
शतचंडी और नवचंडी पूजा, देवी दुर्गा को समर्पित अत्यंत शक्तिशाली और महत्वपूर्ण हिंदू अनुष्ठान हैं। इन पूजाओं में विशेष मंत्रों, हवन, और श्रद्धा से भरपूर विधियों के माध्यम से देवी की आराधना की जाती है। ये समारोह गहराई से धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखते हैं। इन पूजाओं का आयोजन विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता…
अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।। मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।2।। विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।3।। आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।4।। बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति।0कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु…
नील सरस्वती मन्त्र स्तोत्र