पंच दिवसीय आराधना आचार्यजी मेहन्दीपुर बालाजी


नमश्चण्डिकायै, आज एक कुण्डली में प्रत्यक्ष प्रेतशाप के कारण सन्तान बाधा योग दिखा। जातक के पुत्र नहीं हो रहा था। गर्भ ठहरता नहीं, ठहरता भी तो परिपक्वता से पहले ही गिर जाता। बहुत उपाय किये तथापि कोई लाभ नहीं हुआ। डाक्टरी रिपोर्ट सब नार्मल। हमारे पास कुण्डली आयी तो प्रथम दृष्टि में ही पराशरहोरा शास्त्र…
विनियोग ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल-स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः,श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं,मम समस्त विघ्न-दोष-निवारणार्थे, सर्व-शत्रुक्षयार्थेसकल-राज-कुल-संमोहनार्थे, मम समस्त-रोग-प्रशमनार्थम्आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त-पाप-क्षयार्थंश्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये।ध्यानमनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये।।ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते श्रीमहा-हनुमते प्रकट-पराक्रम,सकल-दिङ्मण्डल-यशोवितान-धवलीकृत-जगत-त्रितय,वज्र-देह रुद्रावतार लंकापुरीदहय उमा-अर्गल-मंत्रउदधि-बंधन दशशिरः कृतान्तक सीताश्वसन वायु-पुत्रअञ्जनी-गर्भ-सम्भूत श्रीराम-लक्ष्मणानन्दकर कपि-सैन्य-प्राकारसुग्रीव-साह्यकरण पर्वतोत्पाटन कुमार-ब्रह्मचारिन् गंभीरनाद सर्व-पाप-ग्रह-वारण-सर्व-ज्वरोच्चाटन…
अच्छी कमाई होने के बाद भी घर में नहीं टिकता पैसा, वास्तु के ये उपाय दूर कर सकते हैं गरीबी/वास्तुशास्त्र के अनुसार, घर में परेशानियां आना, बीमारी आना, फिजूलखर्ची होना, धन हानि होना और बाधाएं आना वास्तुदोष का कारण हो सकता है। ऐसे में कुछ वास्तु के नियमों का ख्याल जरूर रखना चाहिए। साथ ही,…
वास्तु शास्त्र: गृह प्रवेश के लिए कभी ना चुनें ये 3 दिन, घर में होता है धन-धान्य का नाश वास्तु शास्त्र के हिसाब से नए घर में प्रवेश हमेशा शुभ तिथि और दिन में ही करना चाहिए। ऐसा करने से घर में सकारात्मकता आती है। साथ ही सारे काम अच्छे से बनने लगते हैं। जानिए…
किसी भी जन्म कुंडली में राहु और केतु ग्रह एक-दूसरे के सामने स्थित होते हैं तब ये दोनों ग्रह किसी भी काम में रुकावटें डालते है। ये ग्रह कुण्डली के जिस भाव में बैठते हैं और उस भाव से संबंधित रुकावटे डालतें हैं। इसे कालसर्प योग भी कहा जाता है। आपको बता दें कालसर्प योग…
मेहंदीपुर बालाजी में “संकट नाशक” हवन का मतलब है संकटमोचन यज्ञ, जो संकटों को दूर करने के लिए किया जाता है। भक्तों का मानना है कि इससे शारीरिक और मानसिक कष्टों का निवारण होता है। यह एक पाँच दिवसीय अनुष्ठान का हिस्सा हो सकता है या 41 दिनों के नियमों के बाद एक acharyajii. Com…