पंच दिवसीय आराधना आचार्यजी मेहन्दीपुर बालाजी


==================================🔸पंचम स्थान व षष्ट स्थान के मालिक यदि एकदूसरे की राशि में स्थित हो तो ऐसे जातक की सन्तान बार- बार गर्भपात के कारण नष्ट हो जाती हैं।🔸#5th Lord अष्टम स्थान में हो तथा पंचम स्थान पर पापी ग्रहों का प्रभाव हो तो जातक को सन्तान सुख प्राप्त नही हो पाता।🔸#5th house पर शनि व…
मार्कण्डेय उवाच॥१६॥ततो वव्रे नृपो राज्यमविभ्रंश्यन्यजन्मनि।अत्रैव च निजं राज्यं हतशत्रुबलं बलात्॥१७॥मार्कण्डेयजी कहते हैं – ॥१६॥ तब राजा ने दूसरे जन्म में नष्ट न होनेवाला राज्य माँगा तथा इस जन्म में भी शत्रुओं की सेना को बलपूर्वक नष्ट करके पुन: अपना राज्य प्राप्त कर लेने का वरदान माँगा ॥१७॥ इस मंत्र की सवा लाख जप करे यानी…
वास्तु शास्त्र: गृह प्रवेश के लिए कभी ना चुनें ये 3 दिन, घर में होता है धन-धान्य का नाश वास्तु शास्त्र के हिसाब से नए घर में प्रवेश हमेशा शुभ तिथि और दिन में ही करना चाहिए। ऐसा करने से घर में सकारात्मकता आती है। साथ ही सारे काम अच्छे से बनने लगते हैं। जानिए…
अंगहरे पुलकभूषण माश्रयन्ती भृगांगनैव मुकुलाभरणं तमालम।अंगीकृताखिल विभूतिरपांगलीला मांगल्यदास्तु मम मंगलदेवताया:।।1।। मुग्ध्या मुहुर्विदधती वदनै मुरारै: प्रेमत्रपाप्रणिहितानि गतागतानि।माला दृशोर्मधुकर विमहोत्पले या सा मै श्रियं दिशतु सागर सम्भवाया:।।2।। विश्वामरेन्द्रपदविभ्रमदानदक्षमानन्द हेतु रधिकं मधुविद्विषोपि।ईषन्निषीदतु मयि क्षणमीक्षणार्द्धमिन्दोवरोदर सहोदरमिन्दिराय:।।3।। आमीलिताक्षमधिगम्य मुदा मुकुन्दमानन्दकन्दम निमेषमनंगतन्त्रम्।आकेकर स्थित कनी निकपक्ष्म नेत्रं भूत्यै भवेन्मम भुजंगरायांगनाया:।।4।। बाह्यन्तरे मधुजित: श्रितकौस्तुभै या हारावलीव हरिनीलमयी विभाति।0कामप्रदा भगवतो पि कटाक्षमाला कल्याण भावहतु…
किसी भी जन्म कुंडली में राहु और केतु ग्रह एक-दूसरे के सामने स्थित होते हैं तब ये दोनों ग्रह किसी भी काम में रुकावटें डालते है। ये ग्रह कुण्डली के जिस भाव में बैठते हैं और उस भाव से संबंधित रुकावटे डालतें हैं। इसे कालसर्प योग भी कहा जाता है। आपको बता दें कालसर्प योग…
नील सरस्वती मन्त्र स्तोत्र