♦️जन्मकुण्डली में सन्तान बाधा योग एवं उपाय ♦️

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🔸पंचम स्थान व षष्ट स्थान के मालिक यदि एकदूसरे की राशि में स्थित हो तो ऐसे जातक की सन्तान बार- बार गर्भपात के कारण नष्ट हो जाती हैं।
🔸#5th Lord अष्टम स्थान में हो तथा पंचम स्थान पर पापी ग्रहों का प्रभाव हो तो जातक को सन्तान सुख प्राप्त नही हो पाता।
🔸#5th house पर शनि व राहु का प्रभाव मृत संतान देता हैं या संतान सुख से हीन करता हैं।
🔸मंगल का पंचम प्रभाव अत्यधिक कष्ट पूर्वक संतान देता हैं, ऐसे जातकों कि संतान ऑपरेशन के द्वारा होती हैं।यदि शुभ प्रभाव हो तो अन्यथा अशुभ प्रभाव में संतान नहीं होती। मंगल व राहु का संयुक्त प्रभाव सर्प श्राप के कारण संतान होने में दिक्कत देता हैं।
🔸 सूर्य का पंचम प्रभाव संतान से वंचित करता हैं, अथवा अत्यधिक प्रयत्न करने से एक संतान की प्राप्ति करवाता हैं।
🔸लग्न, पंचम व सप्तम स्थान पर सूर्य, बुध और शनि का प्रभाव संतान प्राप्ति नही होने देता।
🔸शुक्र यदि पुरुष जातक की जन्म कुंडली में शनि, बुध व राहु के साथ स्थित हो तथा पंचम व सप्तम स्थान पर पापी ग्रहों का प्रभाव हो तो शुक्र(वीर्य) दोष होता हैं ।
🔸पंचम स्थान पर शनि सूर्य का प्रभाव हो तथा राहु या केतु से दृष्टि सम्बंध बनाये तो पितृदोष के कारण संतान प्राप्ति में बाधा आती हैं।
🔸पंचम स्थान पर देवगुरु बृहस्पति स्थित हो तथा पापी ग्रहों का प्रभाव हो तो संतान होने में अनेक बाधाये आती हैं।
🔸#5th Lord व गुरु दोनो एक साथ द्वादश स्थान में स्थित हो तथा मंगल व अष्टमेश पंचम भाव में हो तो जातक को सन्तान सुख से वंचित होना पडता हैं।
♦️कुंडलियों के कुछ Points♦️
🔸पुरुष की कुंडली में शनि की सम्पूर्ण दृष्टि से पंचम भाव प्रभावित है ।
🔸 स्त्री की कुंडली मे भी शनि की दृष्टि से पंचम भाव प्रभावित है अर्थात मृत संतान दे सकता है या फिर गर्भ नष्ट होने के अनेक योग बन सकते हैं।
🔸पुरुष की कुंडली में यहां शुक्र बुध के साथ स्थित है अर्थात वीर्य दोष उत्पन्न कर रहा है ।
🔸स्त्री की कुंडली में पाप ग्रह से प्रभावित है किन्तु शनि शुक्र के मित्र होने कारण संतान प्राप्ति करा सकते हैं ।
🔸पंचम भाव मे गुरु की दृष्टि भी संतान प्राप्ति में बाधा उत्पन्न कर रही है ।
♦️उपाय♦️
🔸बृहस्पति देव संतान कारक होते हैं। गुरु का पूजन करने से विभिन्न प्रकार के दोष स्वत:नष्ट हो जाते हैं।
🔸संतान प्राप्ति के लिये संतान बाल गोपाल पूजन किया जाता हैं, इस पूजन में कृष्ण भगवान का बाल रूप मे पूजन होता हैं।
#संतान प्राप्ति के लिए संतान बाल गोपाल स्तोत्र का पाठ करें।

संतान प्राप्ति के लिए #गो_पूजन ,#अभिलाषाष्टकस्तोत्र,#कृष्णव्रत,#षष्ठीदेवीस्तोत्र, आदि का विधान हैं।

संतान प्राप्ति के लिए विष्णुपुराण के प्रथम अंश का दसवां अध्याय का पाठ।

         ♦️#संतान बाल गोपाल मंत्र♦️

” ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः ।”
🔸हरिवंश महापुराण का पाठ करायें तथा श्रवण करें।
🔸पित्रों के लिये दान करें। पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलायें तथा चीटियों व कौओं को दाना आदि दें।
🔸जातिका 11 प्रदोष व्रत करें तथा भगवान शिव का अभिषेक करें ।
#भगवान शिव का नित्य पूजन ।
आचार्यजी संजय शास्त्री मेहन्दीपुर बालाजी – 9983577192

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